Thursday, March 8, 2018

बाहों में कैद कर लूँ

जी तो करता है सारे जमाने के सामने ही 
आज तुझे बाहों में कैद कर लूँ 
रूसवाई से नहीं यह सोच कर रुक जाती हूँ 
मेरा प्यार बस तेरे लिए है
जमाने को दिखाने के लिये नहीं।

मोहब्बत की बारिश

हुए कुछ अहसास तुमसे मिलने के बाद 
बयां हुए कुछ अल्फ़ाज़ तुमसे मिलने के बाद 
न मिलती तुमसे तो न जान पाती 
न भीग पाती मोहब्बत की बारिश में

ख़ामोशी

तुम थे , मैं थी और थी ख़ामोशी 
हम दोनों तो चुप ही थे 
पर ख़ामोशी बोल पड़ी 
कब तक यूँ ही रहती 
उसने तो कभी सुनी ही नहीं थी 
ऐसे चुप रह कर दिल की जुबाँ

हौंसला नहीं

हिम्मत नहीं फिर ख्वाब सजाने का 
पुराने जख्म ही अभी भर नहीं पाये हैं 
हौंसला नहीं विरह के दर्द सहने का   
ख्वाबों के बिखरने पर फिर नींद में सोने का  

महिला हूँ मैं हिम्मत हूँ मैं

महिला हूँ मैं हिम्मत हूँ मैं 
नारी हूँ मैं शक्ति हूँ मैं 
ममता है मुझमें 
घर की रौनक है मुझसे
रौंदों न मुझे
गर आ गयी
जो अपनी जिद पर
चण्डी हूँ मैं काली हूँ मैं
सम्मान दो बराबरी दो
बेटी हूँ मैं पत्नी हूँ मैं
दोस्त हूँ मैं माँ हूँ मैं
जगत की पालन हार हूँ मैं

Tuesday, January 16, 2018

अपना मुकद्दर

एक तेरे ही इरादे डगमगा गये 
हम तो आज भी उसी मोड़ पर खड़े हैं । 
जहाँ तुम हमें छोड़ गये 
अब क्या गिला शिकवा किसी से 
तुम ही अपना मुकद्दर हमसे तोड़ गये।

दर्द में भी आराम

तुमने मुंह क्या मोड़ा हवाओं ने नाता तोड़ लिया 
तुम जो दूर हुए जैसे किस्मत भी हमें छोड़ गयी 
तुम थे मेरे तो दर्द में भी आराम था 
तुम साथ नही तो खुशियों मैं मुस्कान नहीं।