ये जो तेरी मोहब्बत है,
मुझे पकौड़ी सी लगती है।
गर्म तेल जैसे मेरे इश्क़ में,
यह पल-पल और निखरती है।
तड़पते मेरे दिल की इस कड़ाही से,
जब यह सँवर कर निकलती है।
इस रूह में मचलती है।
प्याले से उठते धुएं में,
मुझे तेरा ही अक्स दिखता है।
हल्की सी मिठास और तेज़ खुशबू से,
ये सारा मंजर महकता है।
तेरा साथ हो और ये बारिश,
बस इतना ही अरमान है।
और साथ में हो एक कप चाय,
क्योंकि इसी में बसती मेरी जान है